फर्जी हत्या मामले में पिता-पुत्र को जेल भेजने का मामला: विवेचक निलंबित, तत्कालीन थानाध्यक्ष पर कार्रवाई के लिए एसपी ने लिखा पत्र

मुख्य संपादक - ओंकार नाथ वर्मा 

UP Samachar Plus 

महराजगंज, 22 दिसंबर। घुघली थाना क्षेत्र के पोखरभिंडा गांव में फर्जी हत्या के मामले में पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीना ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विवेचक भगवान बख्श को निलंबित कर दिया है। वहीं, तत्कालीन थानाध्यक्ष नीरज राय के खिलाफ कार्रवाई के लिए गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा गया है।

मामला उस समय चर्चा में आया जब पोखरभिंडा निवासी संजय ने अपनी बेटी प्रीति की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई। इसी बीच निचलौल थाना क्षेत्र में एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ। तत्कालीन थानाध्यक्ष नीरज राय ने संजय को बुलाकर शव की पहचान कराई और प्रीति का शव मानते हुए पिता संजय और उनके बेटे अम्बरीष को हत्या के आरोप में जेल भेज दिया।

चार महीने जेल में बिताए, बेटी जीवित लौट आई

चार महीने जेल में बिताने के बाद जब संजय और अम्बरीष घर लौटे तो उन्होंने प्रीति को खोजने का प्रयास शुरू किया। इस दौरान प्रीति सुरक्षित घर लौट आई, जिससे इस मामले में पुलिस की लापरवाही और जबरदस्ती का खुलासा हुआ।

 

जबरदस्ती कबूलवाया गया जुर्म

संजय ने आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष ने जबरन उस शव को प्रीति का मानने के लिए दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके बेटे को पुलिस ने इतना प्रताड़ित किया कि बिना शव देखे ही उसे प्रीति मानने पर मजबूर होना पड़ा।

पीड़ितों ने बताया, "हमने कई बार शव को देखने की मांग की, लेकिन पुलिस ने हमें डराया-धमकाया। थाने में हमें बुरी तरह मारा-पीटा गया और हत्या कबूल करने का दबाव बनाया गया। यह सब किसी फिल्मी साजिश जैसा था।"

एसपी ने दिए जांच के आदेश

प्रीति के लौटने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सोमेंद्र मीना ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विवेचक भगवान बख्श को निलंबित कर दिया। वहीं, तत्कालीन थानाध्यक्ष नीरज राय के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।

इस प्रकरण ने पुलिस की कार्यशैली और पीड़ितों के प्रति संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। मामले की जांच जारी है।


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